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भगत सिंह
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Monday, January 25, 2021
सूरज सिंह राजपूत , संपादक राष्ट्र चेतना पत्रिका : मां भारती की आरती
Thursday, August 27, 2020
सूरज सिंह राजपूत ( जमशेदपुर , झारखण्ड ) : मैंने भूख लिखा
मैंने भूख लिखा
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
मेरे भूख में
बेरोजगारी
मंदी
समीक्षा
अशिक्षा का जिक्र था ।
उसके भूख में बस ' भूख ' !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
मेरे भूख में
लाचारी
बंदी
परीक्षा
परिक्षा का जिक्र था ।
उसके भूख में बस ' भूख ' !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
क्योंकि,
भूख लिखते वक्त
मैं ट्रेन के ए. सी. बोगी में था ।
वह भूखा प्लेटफार्म पर !
क्योंकि,
भूख लिखते वक्त
मैं अपने ए. सी. कार में था ।
वह भूखा सिग्नल पर !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
क्योंकि,
मैंने भूख लिखना चाहा ।
उसने भूख मिटाना !
क्योंकि,
मेरे भूख से अलग थी ।
उसकी ' भूख ' !
- सूरज सिंह राजपूत
Sunday, August 23, 2020
कविता : आदमी कितना मजबूर है ( योगिनी काजल पाठक )
आदमी कितना मजबूर है !
ये कैसी उल्फत सफर-ए-जिन्दगी की
यहाँ तो बस नफरतों का सुरूर है,
अपनों से उलझे बेगानों से सुलझे,
इंसान तो बस दिखावे में ही चूर है
मयस्सर नही सुकून पल भर का
निमित्त है साँस लेने की,
रूक जाए तो कौन सम्भाले,
अभी तो चलना बहुत दूर है !
सचमुच,आदमी कितना मजबूर है !
तहजीब-ए-फितरत की दरकार सबसे
लेकिन खुद में सलीको की बिगड़ी दस्तूर है
बसीर-ए-खबर की आस ही नहीं,
अबतक जो मिला महज नकली नूर है !
सचमुच आदमी कितना मजबूर है !
एक ही मंजिल के रास्ते असंख्य,
फिर क्युँ,चढ़ा सबको ऐठन का फितूर है ?
जहाँ से आए हैं फिर वहीं पर जाना है !
सफर-ए-मंजिल अभी बहुत दूर है !
सच मुच आदमी कितना मजबूर है !
योगिनी काजल पाठक
Friday, August 21, 2020
भगवान श्री गणेश जी के 5 महामंत्र अर्थ सहित
महामंत्र : 1
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ - घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूर्ण करने की कृपा करें।
महामंत्र : 2
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।
नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥
अर्थ - विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है ; हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है ।
महामंत्र : 3
अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते ।
मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः ॥
अर्थ - हे हेरम्ब ! आपको किन्ही प्रमाणों द्वारा मापा नहीं जा सकता, आप परशु धारण करने वाले हैं, आपका वाहन मूषक है । आप विश्वेश्वर को बारम्बार नमस्कार है ।
महामंत्र : 4
एकदन्ताय शुद्घाय सुमुखाय नमो नमः ।
प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने ॥
अर्थ - जिनके एक दाँत और सुन्दर मुख है, जो शरणागत भक्तजनों के रक्षक तथा प्रणतजनों की पीड़ा का नाश करनेवाले हैं, उन शुद्धस्वरूप आप गणपति को बारम्बार नमस्कार है ।
महामंत्र : 5
एकदंताय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात।।
अर्थ - एक दंत को हम जानते हैं। वक्रतुण्ड का हम ध्यान करते हैं। वह दन्ती (गजानन) हमें प्रेरणा प्रदान करें।
Saturday, September 14, 2019
हिंदी ( वसंत जमशेदपुरी )
हिंदी गरिमामय भाषा है ( माधवी उपाध्याय )
हिंदी गरिमामय भाषा है।
हिंदी हो ( सोनी सुगन्धा )
मैं हिंदी हूँ (डॉ मनीला कुमारी )
Monday, June 17, 2019
उड़ान - ( वीणा पाण्डेय भारती )
मैने पूजा की
अचर्ना की,और
भगवान प्रसन्न हुए।
बोले,
वत्सला,कुछ मागों।
अविलम्ब,मैंने मांग लिया
मुझे पंख चाहिए
भगवान तथास्तु बोल कर
तत्काल अन्तर्धान हो गए
मैने खुशी से सब को
बातें अपनी बतलायी
सबने मुझे मूर्ख समझा
और मेरी खिल्ली उड़ायी।
नासमझ!
मुझे हीं बुला लिया होता।
ऐशो-आराम की कुछ चीजें मांग लिया होता !
सब की सुन रही थी
और मन हीं मन
इन प्रश्नों का जाल बुन रही थी।
कब करेगा ये समाज
मेरे आन्तरिक गुणों का मूल्यांकन ?
नारी हूं मैं।
आकाश दिख रहा है
विस्तार देखना है
पंख मिल गये हैं
उड़ान भरना है।
वीणा पाण्डेय भारती



